लाइफस्टाइल

Gen-Z Explainer: आलसी या दुनिया बदलने वाली पीढ़ी? ‘जूमर्स’ के वो कारनामे जिनसे हैरान रह गई दुनिया

Gen-Z वो पीढ़ी है जो दुनिया के अलग-अलग कोने में हैरान करने वाले कारनामे करती दिखाई दे चुकी है। Nepal में तो इस जनरेशन ने सरकार ही हिलाकर रख दी है।

By
Share

Leading Bharat Lifestyle: नेपाल में पहली बार ऐसा प्रोटेस्ट देखने को मिला, जिससे एक पूरी जनरेशन का नाम ही जोड़ दिया गया। जनरेशन-जेड काठमांडू की सड़कों पर उग्र प्रदर्शन करती दिखी, जो सोशल मीडिया बैन के खिलाफ था। इस उग्र आंदोलन के सामने सरकार को झुकना पड़ा और फैसला वापस भी ले लिया गया। ये ऐसा प्रदर्शन था जिसके बाद नेपाल की सरकार हिल गई और तख्ता पलट शुरू हो चुका है। ‘जूमर्स’ कही जाने वाली जनरेशन का ऐसा कारनामा देख दुनिया हैरान है। हालांकि, इस पीढ़ी के लोग दुनिया के अलग-अलग कोने में ऐसे शॉकिंग कारनामे पहले भी करते दिख चुके हैं।

Gen-Z ने कैसे पलटी सरकार?

नेपाल में सरकार पलटकर रख देने वाले Gen-Z आंदोलन ने एक पूरी जनरेशन को लेकर दुनिया की आंखें खोल दी हैं। इस देश में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवाओं ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद होगी। इस पीढ़ी को ‘जूमर्स’, ‘मुंहफट’ और ‘आलसी’ जैसे टैग दिए गए लेकिन असल में बात सिर्फ किसी विचार पर नरजरिए और विश्वास की है। काठमांडू में हुए प्रदर्शन के नतीजे से ये साफ है कि जनरेशन-जेड एक विचार पर किस कदर अड़ सकती है, दुनिया के घिसे-पिटे नियम कायदे ताक पर रखती है और ‘आलसी पीढ़ी’ टैग को भी चैलेंज करती है।

Explainer: नेपाल में Gen-Z प्रदर्शन ने खोले 3 विस्फोटक राज, जानें कैसे उधड़ गए ओली सरकार के धागे?

Toxic Work Culture को चुनौती देती जनरेशन

सिर्फ नेपाल ही नहीं दुनिया के अलग-अलग कोने में ये जनरेशन हैरान कर देने वाले कारनामे कर चुकी है। कुछ महीने पहले ही टॉक्सिक वर्क कल्चर को चुनौती देती हुई एक भारतीय लड़की खूब वायरल हुई थी। शताक्षी नाम की इस लड़की ने ऑफिस से लौटते हुए एक वीडियो बनाया था, जिसमें वो बता रही थी कि शिफ्ट ओवर होने के बाद उसके रिपोर्टिंग मैनेजर ने उसे एक्स्ट्रा काम करने को कहा तो उसने टाइम पर निकलने की बात कहते हुए मना कर दिया।

जनरेशन X और Y पर उठाए सवाल

शताक्षी ने बताया कि किस तरह उसके मैनेजर ने ये ताना दिया कि वो 12-13 घंटे काम करता है। इस लड़की ने पुरानी जनरेशन की टॉक्सिक मानसिकता को उजागर करते हुए ‘ओवरटाइम, पर्सनल लाइफ बर्बाद करते जबरस्ती की स्ट्रगल को ग्लोरिफाई’ करने का आरोप लगाया और कहा कि ‘दो रोटी के लिए पैसे कमाने का बाद सुकून से वो रोटी नहीं खा पाओ को उसका क्या फायदा’। इस लड़की पर Gen-Z इंप्लॉई का ठप्पा तो लगा लेकिन कई लोगों का ताबड़तोड़ सपोर्ट भी मिला था। सिर्फ ये लड़की ही नहीं इसी तरह कई Gen-Z युवा, जनरेशन X और Y द्वारा बनाए गए टॉक्सिक वर्क कल्चर को चुनौती दे रहे हैं और इसे बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

Bharat के आगे क्या है China की औकात, जानें दोनों देशों में कौन है ज्यादा ताकतवर?

पलट कर रख दी Gender Pay Gap की बहस

ब्रिटेन के एक अखबार इंडिपेंडेट के मुताबिक जनरेशन-जेड ने जेंडर पे-गैप को भी पलट कर रख दिया है। इस रिपोर्ट में आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया था कि एक कॉर्पोरेट वर्कप्लेस पर Gen-Z लड़कियां अब इस जनरेशन के लड़कों से ज्यादा सैलरी पा रही हैं।

Sexuality पर ऐसे हैं विचार

इसके अलावा सेक्शुएलटी को एक्सेप्ट और एक्सप्लोर करने के मामले में भी ये जनरेशन पुरानी पीढ़ियों के कहीं ज्यादा एडवांस है। इस जनरेशन की तरफ से LGBTQIA+ समुदाय को अब तक सबसे ज्यादा सपोर्ट मिला है। रिलेशनशिप्स की बात करें तो मीड़िया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये जनरेशन ट्रेडिशन, मॉर्डन दोनों संरचनाओं पर भरोसा करती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये जनरेशन शादियों के मामले में एक ही पार्टनर के साथ जिंदगी बिताने वाली मानसिकता पर यकीन करती है।

Recent Posts