Russia India China को एक साथ देखकर America की हवा निकल गई है। आगे जानें ये तीन सुपरपावर्स कैसे दुनिया पलटने की ताकत रखती हैं?


3 Super Powers Russia India China: तीन सुपर पावर भारत चीन रुस
Leading Bharat World: इन दिनों चारों तरफ बीजिंग में चल रही शंघाई सहयोग संगठन (SCO Sumit) की चर्चाएं हो रही हैं। सोमवार को शुरु हुई इस समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छाए रहे। लंबे समय बाद एक बार फिर से चीन और भारत की नदजीकियां दिखाई दीं। इस समिट में बहुत कुछ हुआ लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां 3 सुपरपावर्स के एक साथ आने को लेकर रहीं। ये तीन सुपरपावर्स हैं भारत-चीन और रूस यानी RIC, एक भू-राजनीतिक समूह जिसका सपना पुतिन ने देखा था। इन 3 सुपरपावर्स के सिर उठाते ही दुनिया में हलचल इसलिए मची है क्योंकि ये पूरी दुनिया की गणित बदलने की ताकत रखती हैं।
दरअसल, पुतिन ने रूस में हुई समिट के दौरान ये कह दिया था कि वो रूस, भारत और चीन को एक सुपरपावर बनते देखना चाहते हैं। उस वक्त शी जिनपिंग और पीएम मोदी के साथ हाथ में हाथ डाले हुए पुतिन ने जमकर फोटोशूट करवाया था। वहीं, अब एक बार फिर से इन तीन देशों की वही बॉन्डिंग SCO समिट में देखने को मिली। व्लादिमीर पुतिन, पीएम मोदी और शी जिनपिंग सीक्रेट बातें करते, ठहाके मारते और एक-दूसरे को गले लगाते दिखाई दिए। ये नजारा ऐसे वक्त में दिखा है, जब वॉशिंगटन की तरफ से भारत और चीन को टैरिफ तले दबाने की पुरजोर कोशिशें की जा रही हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में जब से सत्ता आई है, तब से वो अमेरिका की पावर्स से सभी देशों को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने भारत और चीन पर कंट्रोल जमाने के लिए भारी भरकम टैरिफ थोप दिया। भारत से कहा कि रूस से तेल खरीदना बंद करो…पीएम मोदी मे देशहित की बात करते हुए रूस के साथ डील कैंसिल करने से मना कर दिया और अमेरिका ने जी-हुजूरी नहीं करने पर इंडिया पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा डाला। इधर ट्रंप अपनी इस बेतुकी टैरिफ नीति को दुनिया की सभी समस्याओं का हल मानते रहे…उधर अब SCO समिट में 3 सुपरपावर्स को सिर उठाते देख अमेरिकी अर्थ शास्त्री कांप गए हैं।
एक्सपर्ट्स को ये डर तो पहले ही था कि व्यापार के लिए भारत अब अमेरिका का विकल्प खोज रहा है लेकिन SCO समिट के बाद यकीन हो गया है कि अमेरिका 21वीं सदी की इस तिकड़ी का सामना नहीं कर पाएगा। ये समिट साफ तौर पर इशारा है कि भारत अब निर्यात के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता बल्कि चीन जैसे पड़ोसी और रूस जैसे दोस्त देशों के साथ व्यापार करना चाहता है।
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दूसरी तरफ ये 3 सुपरपावर्स एक साथ आते ही दुनिया के कुल उत्पादन का एक तिहाई हिस्सा डॉमिनेट करेंगे। भारत, चीन और रूस मिलकर GDP के मुताबिक PPP में 53.9 ट्रिलियन डॉलर का योगदान करते हैं, जो पूरी दुनिया का वन थर्ड हिस्सा है। तीनों देशों की संयुक्त आबादी 3.1 अरब, जो वैश्विक आबादी का करीब 40 प्रतिशत है। यही नहीं तीनों देशों का निर्यात 5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है और विदेशी भंडार 4.7 ट्रिलियन डॉलर के आस-पास है।
खास बात ये भी है कि तीनों देशों की अपनी अलग-अलग पावर्स हैं। भारत की पावर लगातार बढ़ती सर्विस इकोनॉमी, चीन के पास मैन्युफैक्चरिंग में है तो रूस की एनर्जी सोर्सेस के मामले में ताकतवर है। तीनों देश एक-दूसरे की मदद करते हुए विश्व की सारी नीतियां पलट सकते हैं।
Dollar और यूरेशियन ट्रेड कॉरिडोर को भी चुनौती
अभी तक दुनिया भर में पश्चिम का प्रभुत्व चलता है लेकिन अगर ये तीन शक्तियां साथ आती हैं तो डॉलर के वर्चस्व के साथ-साथ यूरेशियन ट्रेड कॉरिडोर को तगड़ी चुनौती मिलेगी। आर्थिक रूप से, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जिसका विकल्प भारत को इस तीकड़ी से मिल सकता है।